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एक फिल्म निर्माता ने थामा तानपुरा और ‌गाने लगीं, करना रे होय सो कर ले रे साधो...

Published - Sun 08, Mar 2020

फिल्म निर्माता शबनम विरमानी ने कबीर की खोज में लोक गायकों के साथ यात्राएं की और इसी दौरान कब उन्होंने भी पांच तारों वाला तंबूरा बजाना शुरू कर दिया, वह इसे चमत्कार कहती हैं।

शबनम विरमानी एक फिल्म निर्माता और बेहद ही उम्दा गायिका हैं। उनकी डॉक्यूमेंटी फिल्मों को कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। बंगलूरू स्थित  ‘द कबीर प्रोजेक्ट’ की निदेशक शबनम कबीर की वाणी को अपनी अद्भुत गायकी में ढालकर प्रस्तुत करती हैं...उनके गाए लोक गीत आपको प्रभावित करेंगे। यू ट्यूब चैनल पर आप शबनम विरमानी को गाते-बचाते हुए देख-सुन सकते हैं।
फिल्म निर्माता शबनम विरमानी ने कबीर की खोज में लोक गायकों के साथ यात्राएं की और इसी दौरान कब उन्होंने भी पांच तारों वाला तंबूरा बजाना शुरू कर दिया, वह इसे चमत्कार कहती हैं। हाथों मे तंबूरा थामकर जब वे कबीर के विचारों वाले लोक गीत को अपने सुरों के मोतियों में पिरोती हैं तो उनके शब्दों का सटीक उच्चारण और एक अलहदा दमदार आवाज सुनने वालों के दिलों को अंदर तक भिगो देती है। कबीर की विरासत को आगे बढ़ाने का काम कर रहीं शबनम विरमानी अपने भजन की शुरुआत कबीर के दोहों से ही करती हैं, फिर उसका अर्थ भी समझाती हैं।
कब कबीर को अपनाया
गुजरात में हुए 2002 के दंगे से बेहद प्रभावित होने की वजह से शबनम विरमानी ने पहचान, धर्म, धर्मनिरपेक्षता, नश्वरता और अध्यात्मिकता के विचार को नए तरह से समझना शुरू किया। 2003 में उन्होंने मालवा, राजस्थान और 
पाकिस्तान में लोक गायकों के साथ यात्रा की, रास्ता अपनाया कबीर और भक्ति, सूफी और बाउल शायरों का। इस सफर ने उनका जीवन बदल दिया, वो खुद गायिका बन गईं और तब उन्होंने नींव रखी ‘कबीर प्रोजेक्ट’ की। बंगलूरू के ‘सृष्टि इंस्टीट्यूट ऑफ आर्ट, डिजाइन एंड टेकनॉलॉजी’ से काम रही कबीर प्रोजेक्ट की टीम ने संगीत और कविताओं के साथ काम कर कई पुरस्कृत डाक्यूमेंट्री फिल्में, ऑडियो सीडी तैयार किए हैं और कई किताबों का अनुवाद भी किया है।
कबीर के बारे में
15 शताब्दी के संत कबीर ने हिन्दू, मुस्लिम, सिख, दलित सभी को प्रभावित किया। उन्होंने कहा, मुझको कहां ढूंढे रे बंदे, मैं तो तेरे साथ में....यानी ईश्वर न कैलाश में हैं, ना काबा में, वो तेरे पास है, वो घट-घट में विराजमान है। कबीर 
की संपत्ति उनके दोहे, उनके विचार और उनकी वाणी है, जिसे कभी किसी किताब में नहीं उतारा गया। कबीर के विचारों को लोगों ने गाकर, किस्सागोई करके वर्षों तक जीवित रखा। शबनम विरमानी भी अपनी बुलंद आवाज से कबीर के विचारों को लोगों तक पहुंचा रही हैं। ‘द कबीर प्रोजेक्ट’ के माध्यम से शबनम विरमानी यह काम कर रही हैं। राजस्थान यात्रा और मालवा यात्रा के सफल प्रयोग के बाद शबनम विरमानी देश-विश्व में कबीर को जीवंत कर रही हैं। हालांकि शबनम विरमानी को उनकी फिल्मों के लिए मुस्लिमों और हिंदुओं के विरोध का भी सामना करना पड़ा। उन्हें एंटी हिन्दू और एंटी नेशनल तक कहा गया। लेकिन वह कहती हैं कि यह अंधों को आइना दिखाने जैसा है। अब वे कबीर के साथ-साथ अन्य संतों की वाणियों को अद्भुत गायकी में ढालकर प्रस्तुत करती हैं।
 
Story by - Sunita kapoor