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21 साल हो सकती है लड़कियों की शादी की न्यूनतम आयु

Published - Mon 24, Aug 2020

विवाह की न्यूनतम उम्र को लेकर भारत में लंबी बहस चलती आई है। अंग्रेजों के समय में शादी को लेकर पहली बार भारत में कानून बने थे। इन कानूनों में समय-समय पर बदलाव कर इसमें लड़के के विवाह की न्यूनतम उम्र 21 और लड़की की 18 साल उम्र तय की गई थी। अब मोदी सरकार लड़कों और लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र एकसमान करने जा रही है। 

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विवाह की न्यूनतम उम्र को लेकर भारत में लंबी बहस चलती आई है। अंग्रेजों के समय में शादी को लेकर पहली बार भारत में कानून बने थे। इन कानूनों में समय-समय पर बदलाव कर इसमें लड़के के विवाह की न्यूनतम उम्र 21 और लड़की की 18 साल उम्र तय की गई थी। अब मोदी सरकार लड़कों और लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र एकसमान करने जा रही है। 
 
15 अगस्त आजादी के दिन लालकिले से पीएम मोदी ने जब देश को संबोधित किया तो उसमें उन्होंने एक बहुत महत्वपूर्ण संकेत दिया। वह था देश में लड़कियों के लिए शादी की न्यूनतम आयु में बदलाव करने का। भारत में शादी करने की न्यूनतम उम्र लड़कों के लिए 21 और लड़कियों के लिए 18 है। बाल विवाह रोकथाम कानून 2006 के तहत इससे कम उम्र में शादी गैर-कानूनी है, जिसके लिए दो साल की सजा और एक लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है। अब सरकार लड़कियों के लिए इस सीमा को बढ़ाकर 21 करने पर विचार कर रही है। यानी अब लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र 18 से बढ़ाकर 21 की जा सकती है। इससे लड़कियों के जीवन में कई बदलाव आएंगे। सरकार बेटियों के विवाह की न्यूनतम उम्र क्यों बदलना चाहती है? आइए, इस बात को विस्तार से जानते हैं...
1929 के शारदा कानून के तहत शादी की न्‍यूनतम उम्र लड़कों के लिए 18 और लड़कियों के लिए 14 साल तय की गई थी। 1978 में संशोधन के बाद लड़कों के लिए ये सीमा 21 साल और लड़कियों के लिए 18 साल हो गई। 2006 में बाल विवाह रोकथाम कानून ने इन्हीं सीमाओं को अपनाते हुए और कुछ बेहतर प्रावधान शामिल कर इस कानून की जगह ली।
अब सरकार 2020 में इस नियम के तहत लड़कियों को उनकी शादी की न्यूनतम उम्र में छूट देना चाहती है। इसके लिए सरकार ने सांसद जया जेटली की अध्यक्षता में 10 सदस्यों के टास्क फोर्स का गठन किया है, जो इस पर अपने सुझाव जल्द ही नीति आयोग को देगा। देखा जाए तो देश के बड़े शहरों में लड़कियों की पढ़ाई और करियर के प्रति बदलती सोच के कारण उनकी शादी अमूमन 21 साल की उम्र के बाद ही होती है। यानी इस फैसले का सबसे ज्यादा असर छोटे शहरों, कस्बों और गांवों में होगा, जहां लड़कों के मुकाबले लड़कियों को पढ़ाने और नौकरी करवाने पर जोर कम है, परिवार में पोषण कम मिलता है, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच मुश्किल है और उनकी शादी जल्दी कर देने का चलन ज्यादा है। बाल विवाह के मामले भी इन्हीं इलाकों में ज्यादा पाए जाते हैं।
18 साल की उम्र में शादी का मतलब है लड़कियों की पढ़ाई का बीच में ही छूट जाना, घरेलू हिंसा का शिकार होना और प्रसव के दौरान मृत्यु होने का खतरा बढ़ जाना। इसी परिवेश में सरकार के टास्क फोर्स को लड़कियों की शादी की उम्र बढ़ाने पर फैसला उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के हित को ध्यान में रखते हुए करना है। वकील अश्विनी उपाध्याय भी विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहती हैं कि 20 साल की उम्र से पहले शादी करने पर गर्भवती होने की स्थिति में महिला और उसके बच्चे के लिए खतरनाक साबित होता है। साथ ही कम उम्र में शादी होने से लड़कियों की पढ़ाई बीच में छूट जाती है और उन्हें कई सामाजिक और व्यक्तिगत समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अपनी याचिका में उन्होंने कहा है कि शादी की उम्र में अंतर का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। यह रूढ़िवाद को बढ़ावा देता है, साथ ही यह संविधान में दिए गए समानता के अधिकार का भी उल्लंघन है।
इस बीच देशभर से लड़कियों से की गई रायशुमारी में यही सामने आया ‌है कि खुद लड़कियां न्यूनतम उम्र को 21 साल तक बढ़ाए जाने के हक में हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि कानून की वजह से वो अपने परिवारों को शादी करने से रोक पाएंगी।
 
मातृ मृत्युदर में कमी लाना चाहती है सरमार
दरअसल, केंद्र सरकार लड़कियों की न्यूनतम उम्र सीमा में बदलाव करके मातृ मृत्युदर में कमी लाना चाहती है। माना जा रहा है कि सरकार के इस मकसद के पीछ सुप्रीम कोर्ट का वो फैसला है, जिसमें देश की सबसे बड़ी अदालत ने कहा था कि वैवाहिक दुष्कर्म से बेटियों को बचाने के लिए बाल विवाह पूरी तरह से अवैध माना जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने विवाह के लिए न्यूनतम उम्र के बारे में फैसला लेने का काम सरकार पर छोड़ दिया था। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार यह मानकर चल रही है कि शादी के लिए लड़की और लड़के की न्यूनतम उम्र एकसमान होनी चाहिए। देश में लड़कों की शादी की न्यून्तम उम्र 21 साल है। अब अगर लड़की की भी शादी करने की न्यून्तम उम्र 21 साल हो जाएगी तो वह 21 साल की उम्र के बाद ही मां बनेगी, ऐसे में महिला की बच्चे पैदा करने की क्षमता वाले सालों की संख्या अपने आप घट जाएगी। देश में किशोरावस्था में होने वाली लड़कियों की मौत की सबसे बड़ी वजह उनका जल्द मां बनना है।
 
पिछले पांच साल में तीन करोड़ से ज्यादा बेटियां बंधी वैवाहिक बंधन में
बताते चलें कि देश में बीते 5 सालों में 3 करोड़ 76 लाख लड़कियों की शादियां हुईं। इनमें से 2 करोड़ 55 लाख ग्रामीण क्षेत्र में और एक करोड़ 21 लाख शहरी क्षेत्र में हुईं। इनमें से एक करोड़ 37 लाख (1.06 करोड़ ग्रामीण और 31 लाख शहरी) लड़कियों ने 18-19 की उम्र में शादी की। वहीं 75 लाख लड़कियों (49 लाख ग्रामीण और 26 लाख शहरी) ने 20-21 की उम्र में शादी की। ग्रामीण महिलाओं की बात करें तो 5 सालों में 61% ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाली लड़कियों की शादी 18-21 की उम्र के बीच में हुई।
 
इन देशों में नहीं है विवाह की न्यूनतम उम्र
सऊदी अरब, यमन और जिबूती में लड़कियों की शादी की कोई न्यूनतम उम्र तय नहीं है। लेबनान और सुडान में तो नौ साल की उम्र में ही लड़कियों की शादी कर दी जाती है, जबकि ईरान में 13 साल की होने पर लड़की को विवाह योग्य मान लिया जाता है। जबकि चाड और कुवैत में 15 साल की उम्र पार कर लेने के बाद लड़कियों की शादी हो सकती है। अफगानिस्तान, बहरीन, पाकिस्तान, कतर और यूके समेत दुनिया के सात देशों में लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र 16 साल है। वहीं, नॉर्थ कोरिया, सीरिया और उज्बेकिस्तान में शादी की न्यूनतम उम्र 17 साल है।

143 देशों में शादी की न्यूनतम उम्र 18 साल
अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, इटली, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, नॉर्वे, स्वीडन, नीदरलैंड, ब्राजील, रूस, साउथ अफ्रीका, सिंगापुर, श्रीलंका और यूएई समेत दुनिया के कुल 143 देशों में लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र 18 साल तय की गई है। इन देशों में भारत भी शामिल है।
 
​यहां 19-20 साल है शादी की उम्र
अल्जीरिया, साउथ कोरिया और समोआ में लड़कियों की शादी की न्यूनतम आयु 19 साल तय की गई है। वहीं चीन, जापान, नेपाल और थाइलैंड समेत कुल 6 देशों में लड़कियों को शादी के लिए कम से कम 20 साल का होना जरूरी है।
 
​20 देशों में शादी की न्यूनतम उम्र 21 साल
इंडोनेशिया, मलेशिया, नाइजीरिया और फिलिपींस समेत दुनिया के कुल 20 देशों में लड़कियों को शादी के लिए कम से कम 21 साल का होना अनिवार्य है।
 
story by sunita kapoor