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मां-पिता की चिंताओं को पीछे छोड़ा, कड़ी मेहनत कर स्मृति बनीं बीडीओ

Published - Thu 07, Mar 2019

अपराजिता बेटियां बनीं मिसाल

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मैनपुरी।  हर मां-बाप बेटों की तुलना में ‌बेटियों के प्रति फिक्रमंद ज्यादा होते हैं। इसी तरह की चिंताओं के बीच शहर से बाहर निकलकर नगर के करहल रोड निवासी रामनरायन अवस्थी की पुत्री स्मृति अवस्थी ने पिता और जिले का नाम रोशन किया। स्मृति अवस्थी वर्ष 2003 में जब उच्च शिक्षा के लिए मैनपुरी से शिकोहाबाद के लिए तैयार हुईं तो पिता ने उनकी सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता करते हुए दिया। बेटी को लगा कि अब उसका भविष्य संवर नहीं पाएगा। उन्होंने पिता को भरोसा दिया कि उनके स्वाभिमान और नाम पर किसी प्रकार की आंच नहीं आने दी जाएगी। पिता ने उच्च शिक्षा के लिए शिकोहाबाद भेजा। बेटी स्मृति ने पिता के सपनों को साकार किया और वह उच्च शिक्षा हासिल कर वर्तमान में बागपत के बीडीओ के रूप में कार्य कर रही हैं।


कड़ी मेहनत और लगन से बनीं बीडीओ

स्मृति अवस्थी ने वर्ष 2001 में जिले राजकीय बालिका इंटर कॉलेज से हाईस्कूल की परीक्षा पास की। वर्ष 2003 में राजकीय बालिका इंटर कॉलेज से ही 12वीं की परीक्षा पास की। वर्ष 2006 में एनडी डिग्री कॉलेज शिकोहाबाद से उन्होंने बीएससी की परीक्षा पास की। वर्ष 2008 में इसी डिग्री कॉलेज से ही गणित से एमएससी किया। वर्ष 2015 में उन्होंने बीडीओ के रूप में ज्वाइन किया। बागपत में बीडीओ के पद पर कार्यरत स्मृति अवस्थी का कहना था कि यदि इरादे नेक हैं तो मंजिल पाने से कोई नहीं रोक सकता।