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बचपन में भाई ने बाजार जाने से मना किया तो खुद चलाने लगीं बाइक

Published - Thu 07, Mar 2019

अपराजिता चेंजमेकर्स बेटियां

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लखनऊ। भाई को छोटी-छोटी चीजें लाने के लिए कहना पड़ता था, तो वह नखरे दिखाता था। एक दिन खुद ही उसकी बाइक उठाई और सीखनी शुरू कर दी। फिर एक दिन रॉयल एनफील्ड चलाने का मन किया फिर यही पसंदीदा बाइक बन गई। बाइकरनी ग्रुप की लखनऊ चैप्टर की प्राची की यही कहानी है। वे अपनी टीम की सदस्यों देविना, नीतू सिंह, नीतू यादव, अपूर्वा, सुमति व आयशा के साथ मिलकर बाइक राइडिंग के जरिए लोगों में सड़क सुरक्षा, महिला सशक्तीकरण समेत कई तरह के संदेश दे रही हैं। ग्रुप की सभी सदस्य जॉब में हैं, लेकिन बाइकिंग के बहाने अपनी सोशल ड्यूटी पूरी कर रही हैं। कहती हैं, लोग हमें सुनते हैं, क्योंकि हम कुछ अलग तरीके से जाकर अपनी बात कहते हैं।

बुर्का वाली राइडर
इसी ग्रुप की सदस्य हैं बुर्काराइडर आयशा आमीन। आयशा ने बुर्का पहनकर बाइकिंग का संदेश दिया। वे कहती हैं, मैं चार-पांच साल से बाइक चला रही हूं। मुझे कभी बुर्का पहनकर बाइक चलाने में दिक्कत नहीं हुई। आमतौर पर कहा जाता है कि हिजाब, बुर्का आपकी प्रगति में  बाधा है, जबकि ऐसा होता नहीं है। अपनी परंपराओं के साथ भी हम आगे बढ़ सकते हैं।

प्राची जैन/आयशा आमीन/ देविना/ नीतू सिंह/ नीतू यादव/ अपूर्वा/ सुमति अरोड़ा