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कानून हो सख्त तभी बेटियां होंगी सुरक्षित

Published - Sat 08, Feb 2020

अमर उजाला अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत शुक्रवार को वसुंधरा स्थित क्रिस्टल पैलेस में समाज सेविकाओं के बीच संवाद कराया गया।

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साहिबाबाद। अमर उजाला अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत शुक्रवार को वसुंधरा स्थित क्रिस्टल पैलेस में समाज सेविकाओं के बीच संवाद कराया गया। महिलाओं ने इस मामले में अपने विचार रखते हुए कहा कि जो लोग गुनहगारों का साथ दे रहे हैं, वह भी दोषी हैं। समाज में ऐसे लोगों का भी बहिष्कार होना जरूरी है। ताकि गलत लोगों को बचाने के लिए अन्य लोग सामने न आएं। निर्भया मामले में हो रही देरी यह बता रही है कि कानून में बदलाव की सख्त जरूरत है।

  • दुष्कर्म जैसे आरोप की सुनवाई प्रतिदिन होकर एक माह के अंदर फैसला सुना देना चाहिए। इस तरह के मामले में अगर देश में 10-15 फांसी हो गई तो हमारी बेटियां खुद ही सुरक्षित हो जाएंगी। निर्भया के बाद सैकड़ों मामले ऐसे हुए लेकिन आज तक सभी मामलों में फैसला पेंडिंग है। - निशा शंकर
  • अपराधियों के मन में कोई डर रह ही नहीं गया है। जब तक कानून सख्त नहीं होगा, लोगों में डर नहीं बैठेगा, तब तक बेटियां समाज में असुरक्षित ही रहेंगी। जिस तरह से संविधान में बदलाव किया गया है कानून में भी बदलाव की जरूरत है। - सादाफ निजाम
  • महिला अपराध पर कभी भी राजनीति नहीं होनी चाहिए। इस देश में महिला अपराध को भी राजनीतिक पार्टियां अपने-अपने हिस्से से जोड़ लेती हैं, जिसके दुष्परिणाम सामने आते हैं। संस्कारों की कमी के कारण आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। - निधि शर्मा
  • वर्तमान समाज में हमारे बच्चे बाहर सुरक्षित नहीं हैं। इसकी वजह कानून की लचर व्यवस्था है। आपराधिक मानसिकता वाले लोग लचीली कानून व्यवस्था का फायदा उठाते हैं। लोगों के मन में डर खत्म हो चुका है। उन्हें लगता है कि वह अपराध करके भी सुरक्षित हैं। ऐसी सोच की वजह से समाज असुरक्षित हो रहा है। - रुचि शर्मा
  • सरकार को चाहिए कि प्रत्येक गरीब को दो-दो कमरे का मकान जरूर मिलना चाहिए, ताकि एक कमरे में माता-पिता हों और दूसरे कमरे में बच्चे रहें। कई बार एक ही कमरे में सबके होने से बच्चों की मानसिकता पर गलत प्रभाव पड़ता है। शिक्षा और संस्कार के साथ ही व्यवस्था भी होना जरूरी है। यही नहीं अपराधियों का केस लड़ने वाले वकीलों का भी समाज से बहिष्कार होना जरूरी है। - विमला सिन्हा
  • परिवार में बेटा-बेटी की समान परवरिश पर ध्यान देना होगा। कई बार परिवार से ही असमानता शुरू हो जाती है। परिवार में ही बेटियों को अहसास दिला दिया जाता है कि वह कमजोर हैं और बेटे को यह लगने लग जाता है कि वह सर्वेसर्वा है। यही सोच आपराधिक मानसिकता को बढ़ावा देती है। - लज्जा गुप्ता
  • एक माह के अंदर दुष्कर्म आरोपियों को सजा दिए जाने का प्रावधान होना चाहिए। कई बार जब पीड़िता और उसका पूरा परिवार खत्म हो जाता है तब जाकर फैसला आता है। फैसले की आस में कई जिंदगियां खत्म हो जाती हैं। कानून को सख्त करने की जरूरत है। - निशि गुप्ता
  • निर्भया कांड के बाद भले ही ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक बना दिया गया लेकिन फिर भी सात साल बाद तक भी निर्भया के आरोपियों को ही सजा नहीं मिल सकी है। देश के इतने बड़े संगीन अपराध में जब फैसला आने में इतने वर्ष लग गए ऐसे में बहुत से लोग अपने प्रति हुए अपराध के खिलाफ पुलिस स्टेशन तक भी जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। - किरण श्रीवास्तव
  • महिलाओं के प्रति अपराध में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसकी वजह जुर्म साबित होने के बाद भी दोषियों को सजा न मिल पाता है। अपराधी बेल पर छूट कर आते हैं और दोबारा अपराध करते हैं। ऐसे में सरकार को चाहिए कि कानून व्यवस्था में बदलाव करे। - सुधा गुप्ता
  • महिलाएं हमारे जमाने में सेफ थीं, मीलों दूर तक हम लोग पैदल पढ़ाई करने जाते थे लेकिन कभी किसी तरह की छेड़खानी नहीं होती थी। अब बच्चों को मोरल एजूकेशन नहीं दिया जा रहा, जिससे ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। - लक्षणा श्रीवास्तव
  • आज भी भारत की महिलाएं आजाद नहीं हुई हैं। अपने देश में अपने शहर में हम लोग शाम के समय घर से निकलने में हिचकते हैं। पुरुषवादी मानसिकता के हावी रहने से समाज में महिलाएं असुरक्षित हैं। - स्मृति अस्थाना
  • इंटरनेट पर बहुत कुछ गलत परोसा जा रहा है। हमें समय पर बच्चों को सेक्स एजूकेशन देने की जरूरत है ताकि बच्चे गुमराह न हो सकें और गलत रास्ते पर न जाएं। - मुन्नी देवी
  • समाज में महिला अपराध को रोकने के लिए सभी को मिलकर कदम उठाना होगा। केवल कानून और पुलिस से ही बात नहीं बनेगी। हर जगह अपराध रोकने के लिए पुलिस नहीं खड़ी रहेगी। सभी को जागरूक होकर अपराध के खिलाफ एकजुट होना होगा। - अंजली
  • कैंडल मार्च निकालने की बजाय लोगों को महिलाओं के प्रति अपराध पर मुखर होना होगा। हम कई बार दूसरे का मामला है, यह कहकर कन्नी काट लेते हैं। समाज में सुधार के लिए सभी को जागरूक होना होगा और अपराधियों के खिलाफ आवाज उठानी होगी। - रीता