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सचमुच की पावर वीमेन बनीं ​स्वाति

Published - Mon 04, Mar 2019

अपराजिता मैदान की धुरंधर

aprajita maidaan ki dhurandhar swati singh

काशी की व्यायामशाला में जिम्नास्टिक की प्रैक्टिस करती थी, पर नेशनल खेलने को कभी नहीं मिला। इस बीच उसने महसूस किया कि उसे 'लोहा गेम' पसंद है। खुद की पसंद को तवज्जो दी और स्वाति सिंह ने शुरू कर दी वेटलिफ्टिंग। फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2006 से 2008 तक ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी चैंपियन रहीं। जूनियर वर्ल्ड चैम्पियनशिप साउथ अफ्रीका 2004 में सिल्वर मेडल जीता। कॉमन वेल्थ गेम्स 2010 में हिस्सा लिया। कोशिशें जारी रहीं और 2014 के कॉमन वेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता। इसी वर्ष कजाकिस्तान में ओलंपिक क्वालिफाई इवेंट में हिस्सा लिया। इसके बाद पारिवारिक कारणों से ब्रेक ले लिया। फिर लाइफ में ऐसा मोड़ आया कि तय कर लिया कि वापस वेटलिफ्टिंग में खुद को साबित करना है।

वापसी की और खुद को साबित भी किया
बीते दिन पारिवारिक जीवन में कुछ परेशानी के बाद एक बार फिर स्वाति खेल की ओर लौटी। लौटते ही इंडिया कैंप में जगह बनाई और थाईलैंड में ईजीयूटी कप 2019 में हिस्सा लेकर साबित कर दिया कि वाकई स्वाति एक पावर वीमेन है। वर्तमान में रेलवे में हेड टिकट एग्जामिनर स्वाति बताती हैं कि बीते दिनों जो कुछ भी हुआ, उसकेबाद मैंन केडी सिंह स्टेडियम जाना शुरू किया। लोगों का ध्यान मेरे खेल से ज्यादा व्यक्तिगत जीवन पर रहता, कई तरह के सवालों का सामना करना पड़ा। गेम पर फोकस करने के लिए मैं लखनऊ से निकल आई।

मैंने ठाना है : स्वाति कहती हैं कि हमारा फोकस 2022 कॉमन वेल्थ गेम पर है।

'यदि आप सच्चे खिलाड़ी हैं तो आप कभी बैठ नहीं सकते और वापसी कुछ मश्किल नहीं।'

- स्वाति सिंह
वेटलिफ्टर