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महिलाओं-बच्चों को आत्मनिर्भर बना रहीं 'स्पेशल-12' की टीम

Published - Sat 06, Apr 2019

अपराजिता चेंजमेकर्स

aparajita changemakers special 12 women team faridabaad

- महिलाओं ने बनाया ऐसा एनजीओ कि बच्चों-महिलाओं को दे रही आगे बढ़ने का मौका

- मेले लगाकर महिला हस्तशिल्प को करते प्रमोट, मेले की कमाई से होनहार बच्चों को लेते हैं गोद


फरीदाबाद। महिलाएं समाज निर्माण करती हैं, यह बात उन 12 समाज सेवा प्रेमी महिलाओं पर खरी साबित हो रही है जो प्रोफेशनल होते हुए समाज के दो वर्गों को आगे बढ़ा रही हैं। 12 महिलाओं के समूह ने दो गैर लाभकारी संस्थाएं स्थापित की हैं। पहली संस्था महिला और बच्चों को कामयाबी की ओर बढ़ा रही हैं। दूसरी संस्था समाज में सांस्कृति को बढ़ावा दे रही है। संस्था आर्थिक रूप से पिछड़े उन बच्चों को गोद लेती है, जो पढ़ना चाहते हैं, कुछ कर गुजरना चाहते हैं लेकिन आर्थिक हालात की वजह से हौसला नहीं जुटा पाते। साथ ही ऐसी महिलाएं भी इस संस्था के बूते आगे आ रही हैं जो हस्तशिल्प में माहिर हैं, बस एक मंच की तलाश में हैं। देनू चंदा, मनीषा, संध्या मंत्री, रेखा चौधरी, रेखा वैद्य, नितिका, निमिता, नुपूर, पीयूष भाटिया, नीति व दो अन्य महिलाएं पेशेवर हैं। इन्होंने 12 साल पहले दो लाइफ स्टाइल फिल्नथ्रोपी वर्क सोसायटी नाम की एनजीओ बनाई। संस्था के जरिए ये महिलाएं वर्ष में दो बार ऐसे मेले लगाती हैं, जो हस्त कला को प्रमोट करे। मेले की आमदनी को आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करते हैं। संस्था सदस्य प्रवीन भाटिया बताती हैं कि कई ऐसे बच्चे आज इंजीनियर व नर्सिंग सहित तमाम अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़ आत्मनिर्भर हो चुके हैं। प्रवीन बताती हैं कि संस्था के जरिए हस्तकला को प्रमोट कर कई महिलाएं मुख्यधारा में आ चुकी हैं। कई महिलाओं ने कुटीर उद्योग व मध्य उद्योग तक स्थापित कर लिए हैं।  संस्था से जुड़ी यह महिलाएं खासतौर पर विंग, पेच वर्क, ज्वैलरी डिजाइन, टिशु बॉक्स, थैले व अन्य सामग्री बनाती हैं।

गोद लिए कई बच्चे बने इंजीनियर व अन्य प्रोफेशनल
प्रवीन
बताती हैं कि वह खुद भी लाइफ कोच हैं। वह रिश्तों, एहसास व अन्य संवेदनाओं को मजबूत करने के लिए लोगों को प्रेरित करती हैं। कई स्कूलों में भी वह विद्यार्थियों को सामाजिक पहलुओं से अलग व्यक्तित्व विकसित करने में मदद करती हैं। वहीं संस्था ने जिन बच्चों को गोद लिया है, वह आज अपने क्षेत्र में पेशेवर हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि कई ऐसे बच्चे वाईएमसीए से पढ़कर इंजीनियर बन गए हैं तो कई बेटियां नर्सिंग पेशेवर हो चुकी हैं।