इस लॉकडाउन पीरियड में हर संवेदनशील व्यक्ति अपने कर्तव्यों से विमुख नहीं होना चाहता है। ऐसी ही कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल पेश की है आईएएस सृजना गुम्माला ने। वह अपना मातृत्व अवकाश रद्द कराकर महज 22 दिन के बच्चे को लेकर ड्यूटी ज्वाइन करने पहुंच गईं। उनके इस फैसले की हर तरफ तारीफ हो रही है।
नई दिल्ली। सृजना गुम्माला आंध्र प्रदेश कैडर की आईएएस अधिकारी हैं और ग्रेटर विशाखापट्टनम की म्यूनिसिपल कमिश्नर हैं। इस लॉकडाउन पीरियड में वह मातृत्व अवकाश पर चल रही थी। पिछले महीने ही उन्होंने एक बेटे को जन्म दिया, जो अब 22 दिन का हो चुका है। इस लॉकडाउन पीरियड में जहां प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी अपनी ड्यूटी निभा रहा है वहीं सृजना से भी इस परिस्थिति में घर पर नहीं बैठा गया। उन्होंने झट फैसला लेते हुए अपनी छह माह की छुटि्टयां रद्द करा दीं और अपने 22 दिन के बच्चे को लेकर कार्यालय पहुंच गईं।
इस परिस्थिति में घर में नहीं लग रहा था मन
बतौर सृजना कोरोना वायरस के बढ़ते संकट को देखते हुए उनका मन घर में नहीं लग रहा था इसलिए वह अपनी छुट्टियां रद्द कराकर काम पर लौट आई। इस हालात में जब पूरा देश एकजुट है, ऐसे में घर बैठना ठीक नहीं लग रहा था। मन बार-बार कचोट रहा था। हालांकि बच्चा काफी छोटा है लेकिन मैं पूरी सतर्कता बरतूंगी।
बेटे को लेकर रहती हैं सजग
वह पूरी सुरक्षा और सतर्कता के साथ अपने बेटे को लेकर कार्यालय लेकर आ रही हैं और काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इस संकट के दौर में लोगों को स्वच्छ पानी उपलब्ध कराना और साफ सफाई सुनिश्चित करना बहुत जरूरी है।
परिवार भी कर रहा सहयोग
सृजना कहती हैं कि यह फर्ज निभाने में उनका परिवार भी पूरा सहयोग कर रहा है। सबके कहने के बाद अब वह बच्चे को घर पर छोड़कर आ रही हैं। उन्होंने फैसला लिया है कि हर चार घंटे में जाकर बच्चे को फीड कराएंगी। इन दिनों उनके वकील पति भी बच्चे की देखरेख में लगे हैं।
नारी गरिमा को हमेशा बरकरार रखने और उनके चेहरे पर आत्मविश्वास भरी मुस्कान लाने का मैं हर संभव प्रयास करूंगा/करूंगी। अपने घर और कार्यस्थल पर, पर्व, तीज-त्योहार और सामाजिक, सांस्कृतिक व धार्मिक आयोजनों समेत जीवन के हर आयाम में, मैं और मेरा परिवार, नारी गरिमा के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता से काम करने का संकल्प लेते हैं।
My intention is to actively work towards women's dignity and bringing a confident smile on their faces. Through all levels in life, including festivals and social, cultural or religious events at my home and work place, I and my family have taken an oath to work with responsibility and sensitivity towards women's dignity.