अपराजिता सोशल फाइटर्स
बात 2002 की है। बेटी अचानक बीमार पड़ी और लंबे समय तक बुखार ने उसे नहीं छोड़ा। हम उसे दिखाने केजीएमयू ले गए। वहां एक बीमार बच्चा था, जिसे पैसे की कमी के चलते लौटाया जा रहा था। हमने उसके इलाज का खर्च दिया। इसके बाद मेरी बेटी ठीक होने लगी, लगा उस बच्चे के माता-पिता की दुआ लग गई। तब हमने खुद से वादा किया कि किसी बच्चे को अब पैसे की कमी के चलते बिना इलाज नहीं लौटने देंगे। हमने सोचा कि यदि हमें इसे एक जन आंदोलन का रूप देना है तो लोगों को जोड़ना होगा और मदद भी लेनी होगी। इसी सोच के साथ 2005 में ईश्वर चाइल्ड वेलफेयर फाउंडेशन की स्थापना की।
कैंसर से लेकर एचआईवी पीड़ित तक
सपना बताती हैं, हम अकेले चले थे लेकिन आज 8000 से अधिक लोग हमसे जुड़ चुके हैं। कोशिशें रंग लाने लगीं तो सर्वाइवल रेट में भी बढ़ोतरी हुई। ऐसे में बच्चों के पुनर्वास और उनको मुख्यधारा से जोड़ने की चुनौती थी। हमने उनको पढ़ाने की व्यवस्था की, साथ ही उनके माता-पिता को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के प्रयास शुरू किए। इसके लिए कौशल विकास पर फोकस किया। साथ ही हम एचआईवी पेशेंट की मदद के लिए भी प्रयास शुरू कर चुके हैं। हमारा मानना है कि कैंसर जैसी लाइलाज बीमारी पर लोग हाथ डालना नहीं चाहते और हम उन्हीं बीमारियों के खिलाफ आगे बढ़ रहे हैं।
‘लाइलाज बीमारी के खिलाफ किसी को तो खड़ा होना होगा, तो वो हम क्यों नहीं हो सकते।’
- सपना उपाध्याय
ईश्वर चाइल्ड वेलफेयर फाउंडेशन
नारी गरिमा को हमेशा बरकरार रखने और उनके चेहरे पर आत्मविश्वास भरी मुस्कान लाने का मैं हर संभव प्रयास करूंगा/करूंगी। अपने घर और कार्यस्थल पर, पर्व, तीज-त्योहार और सामाजिक, सांस्कृतिक व धार्मिक आयोजनों समेत जीवन के हर आयाम में, मैं और मेरा परिवार, नारी गरिमा के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता से काम करने का संकल्प लेते हैं।
My intention is to actively work towards women's dignity and bringing a confident smile on their faces. Through all levels in life, including festivals and social, cultural or religious events at my home and work place, I and my family have taken an oath to work with responsibility and sensitivity towards women's dignity.